Read Anywhere and on Any Device!

Special Offer | $0.00

Join Today And Start a 30-Day Free Trial and Get Exclusive Member Benefits to Access Millions Books for Free!

Read Anywhere and on Any Device!

  • Download on iOS
  • Download on Android
  • Download on iOS

Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad

Habib Tanvir
4.9/5 (9960 ratings)
Description:इस नाटक में हबीब जी ने प्रेम को नए रूप में ढाल कर पेश किया है। छतीसगढ़ में शरद पुर्णिमा के दिन एक त्योहार मनाया जाता है जिसे ‘छेर-छेरा’ कहते हैं। इस त्योहार के दिन नौजवान लड़के अनाज और सब्जी लोगो से मांग कर जमा करते हैं और बाद में पूरा युवक समाज त्योहार के दिन झंगलू और मंगलू गाँव के दो लड़के शान्ति और मान्ती के साथ छेड़छाड़करते हैं। इसी बीच झंगलू को मान्ती से प्रेम हो जाता है। मान्ती का पिता इस निर्धन लड़के बजाए एक बूढ़े मालदार सरपंच से मान्ती की शादी कर देता है झंगलू अपने मित्रों के साथ लड़की की तलाश में निकल जाता है। लड़के देवार जाति के लोगो का वेष बदलकर सरपंच के गाँव पहुँचजाते हैं। उसे छेड़ते और तरह-तरह से बेवकूफ बनाते हैं। इस समय गाँव में शंकर पार्वती की पूजा हपो रही है जिसे ‘गौरी-गौरा’ कहते हैं। इस संस्कार में मान्ती भी शामिल है। झंगलू इस दौरान किसी तरकीब से अपनी प्रेमिका को भाग ले जाता है। नाटक प्रेम की जीत के गीतों पर समाप्त होता है।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad. To get started finding Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Vani Prakashan
Release
2004
ISBN
9352291301

Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad

Habib Tanvir
4.4/5 (1290744 ratings)
Description: इस नाटक में हबीब जी ने प्रेम को नए रूप में ढाल कर पेश किया है। छतीसगढ़ में शरद पुर्णिमा के दिन एक त्योहार मनाया जाता है जिसे ‘छेर-छेरा’ कहते हैं। इस त्योहार के दिन नौजवान लड़के अनाज और सब्जी लोगो से मांग कर जमा करते हैं और बाद में पूरा युवक समाज त्योहार के दिन झंगलू और मंगलू गाँव के दो लड़के शान्ति और मान्ती के साथ छेड़छाड़करते हैं। इसी बीच झंगलू को मान्ती से प्रेम हो जाता है। मान्ती का पिता इस निर्धन लड़के बजाए एक बूढ़े मालदार सरपंच से मान्ती की शादी कर देता है झंगलू अपने मित्रों के साथ लड़की की तलाश में निकल जाता है। लड़के देवार जाति के लोगो का वेष बदलकर सरपंच के गाँव पहुँचजाते हैं। उसे छेड़ते और तरह-तरह से बेवकूफ बनाते हैं। इस समय गाँव में शंकर पार्वती की पूजा हपो रही है जिसे ‘गौरी-गौरा’ कहते हैं। इस संस्कार में मान्ती भी शामिल है। झंगलू इस दौरान किसी तरकीब से अपनी प्रेमिका को भाग ले जाता है। नाटक प्रेम की जीत के गीतों पर समाप्त होता है।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad. To get started finding Gaon Ke Naon sasurar Mor Naon Damaad, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Vani Prakashan
Release
2004
ISBN
9352291301
loader